मखमली आवाज का वो जादुई स्पर्श ।


संगीत की ताकत, उसके जादू के जिन किस्सों को हम बचपन से सुनते आए हैं। उनकी हकीकत से रूबरू होना हो तो तलत महमूद की मखमली आवाज से होकर गुजरना होगा। तलत साहब की आज 86वीं सालगिरह है।

1924 में लखनऊ के एक रवायती मुस्लिम परिवार में जन्में तलत महमूद को कुदरत ने रेशमी आवाज से नवाजा था। उनकी आवाज की अनोखी लरजिश ने उन्हें सिने – गजल गायिकी में एक अलग मुकाम दिलाया। मारिस म्यूजिक कालेज से संगीत की शिक्षा के दौरान महज 16 साल की उम्र में उन्हें आल इंडिया रेडियो पर गाने का मौका मिला। कहते हैं हीरे की परख जौहरी ही जानता है। 1941 में एचएमवी ने उनकी आवाज मे पहला एलबम निकाला सब दिन एक समान नहीं था। उनकी गजल तस्वीर ' तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी... ने उनकी पहचान हिंदुस्तान के कोने-कोने में फैला दी।

तलत की पारंपरिक नायक की सी धज ने उन्हें हीरो बनने को प्रेरित किया। वे सिनेमा में नायक के रूप में भाग्य आजमाने कोलकाता के रास्ते मुंबई जा पहुंचे। मशहूर फिल्मकार एआर कारदार ने उन्हें अपनी फिल्म दिल ए नादां में नायक चुना। उस फिल्म में तलत का गाया गीत- जिंदगी देने वाले सुन उनकी पहचान बन गया। बहुत जल्द उन्हें महसूस हो गया कि वे अभिनय के लिए नहीं बने हैं।

तलत की आवाज का मखमली कंपन उन्हें अपने समकालीन अन्य गायकों से अलग बनाता था लेकिन कुछ लोगों की नकारात्मक कमेंट से निराश तलत वैसी गायिकी से तौबा करने चले । बात पहुंची मशहूर संगीतकार अनिल बिस्वास तक। उन्होंने तलत को जमकर डांट लगाई। बिस्वास ने कहा कि आवाज की यही थिरकन उन्हें तलत महमूद बनाती है। वरना क्या गायकों की कमी है सिनेजगत में।

तलत साहब की गायिकी का अंदाजा लगाने के लिए एक एक्सरसाइज करते हैं। किसी भी लोकप्रिय फिल्मी गीत को याद करें। तत्काल दिमाग में गायक के साथ एक अभिनेता की छवि उभर आती है। अब तलत के गाए गीतों को याद करें। मैं दिल हूं इक अरमान भरा…, ए मेरे दिल कहीं और चल…जलते हैं जिसके लिए… शामे गम की कसम…हमसे आया न गया… ए दिल मुझे ऐसी जगह ले चल…आदि गीतों की लंबी फेहरिस्त है जिन्हें सुनते हुए कोई चेहरा याद नहीं आता केवल तलत की रसीली आवाज कानों में घुलती है।

हालांकि तलत की आवाज की यही खूबी उनकी सीमा भी थी। गजलों के अलावा उन्हें हर तरह के गीत गाने को नहीं मिले। 60 के दशक में राक एंड रोल तथा ओर्केस्ट्रा ने तलत जैसे गायक को चलन से लगभग बाहर कर दिया लेकिन परदे के बाहर उनके चाहने वालों की कमी थोड़े ही थी। वे 1956 में सिंगिंगकंसर्ट में विदेशा जाने वाले पहले भारतीय गायक बने। सन 1991 तक उन्होंने अफ्रीका, अमेरिका, यूके, वेस्ट इंडीज के अनेक देशों में आवाज का जादू बिखेरा। अमेरिका में तो जो फ्रैंकलिन ने अपने मशहूर टीवी शों में उनका परिचय फ्रैंक सिनात्रा आफ इंडिया के रूप में कराया।

9 मई 1998 को दुनिया से रुखसत हुए तलत साहब की याद उनके लाखों प्रशंसकों के दिलों में आज भी जिंदा है और हमेशा रहेगी।


14 comments:

amreen khan ने कहा…

bahot shandar padkar accha laga

amreen khan ने कहा…

bahot shandar padkar accha laga

सागर ने कहा…

ek- do gaane ka link bhi padka dete bhai yahin par lage haathon...

संदीप पाण्डेय ने कहा…

सागर जी मैंने भी इस बारे में सोचा था लेकिन मुझे गाने का लिंक देते अब तक नहीं आता। एक बार फिर कोशिश करता हूं।

Shrikant Dubey ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Shrikant Dubey ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया संदीप जी, यह याद दिलाने के लिए और तलत महमूद के बारे में तफसील देने के लिए. आप और सागर जी के लिए ये लिंक शायद कारगर हो.

http://www.songs.pk/the_silken_voice_talat_mahmood1.html

आप चाहें तो दूसरे कई फनकारों के गाने भी यहाँ सुन और डाउनलोड कर सकते हैं.

http://www.songs.pk/artists.html

Pooja ने कहा…

तलत महमूद के गीतों से मेरा परिचय अजीत सर ने कराया था. फिर तो उनके गाए गीतों में मेरी भी दिलचस्पी हो गयी. सुन्दर लेख.

चन्दन ने कहा…

तस्वीर बनाता हूँ तस्वीर नही बनती..
पल भर के लिये मेरी दुनिया में चली आओ
मुझसे तो मेरी बिगड़ी हुई तकदीर नही बनती


तलत का ही एक गीत है यह। ऐसा ही एक सीरिज, ना हो तो, शुरु करो। कम लोकप्रिय गायकों पर।

ajeet kumar ने कहा…

bhayi saheb bahut kam logon ko patta hoga ki Barahdari film ke is geet ke composer nashaad ( NAUSHAD NAHI) the. Nashaad ne barahdari ke alawae aur 2 fimon me hi sangeet diya. Aur jis geet ka aaapne jikra kiya HAI usse likha famous shayar khumar barabanki ne. khumar saheb ne bhi mushkil se 5-6 fimon ke liye hi geet likha lekin jo bhi likha lajbaB LIKHA.

ajeet kumar ने कहा…

sandeep talat saheb ka jikar aur ye hawa ye raat ye chandani ka jikra nahi, pachta nahi,
mere liye talat ke sabse jyada pasandida geet:
1) ye hawa ye raat ye chandani
2) Sinne mai sulgate hai arma
3) unhe tu bhul ja ai dil
4) shukriya ye pyaar tera shukriya
5) meetwa kaisi anboojh pyaas
6) Meri yaad me tu n aansoon bahana
7)Likha hai meri kismat mai jahan ki thokre khana
8) Bechaain najar betaab jigar
9) Hai sabse madhur wo geet jinhe
10) Phir wahi sham wahi gham

ajeet kumar ने कहा…

sandeep Anil Da ne hi break diya talat ko. Film thi Aarzoo. Aur wo pahla geet tha ai dil mujhe aisi jagah le chal. Majrooh ne ghalib kei ghajal rahiye aab aisi jagah chalkar jahan koyi na ho, ko samne rakhkar is ghajal koo likha tha. Anil da ne is film mai raag darbari ka gajab istemal kiya hai. Geet mai interlude ka bhi bejod istemal hai. Aur jo sabse khaas hai wo hai talat ki larajati aawaj. Ek bbat aur bata doon Anil da ne n sirf talat ko balki mukesh ko bhi film pahli najar se break diya. Aur wo geet bhi Raag Darbari par hi aadharit tha. Bol the dil jalta hai to jaln de...

संदीप पाण्डेय ने कहा…

सर मैंने आपसे पहले भी कहा का फिर कहता हूं तलत साहब पुर कुछ लिखिए ब्लाग के लिए। तलत साहब के जिन गीतों का आपने जिक्र किया है उनमें से अधिकांश तो याद भी हैं मुझे। लेकिन लिखते वक्त ध्यान पर नहीं रहा और क्या कहूं

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