
यहाँ दरख्तों के साए में धूप लगती है
चलो यहाँ चलें और उम्रभर के लिए
न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढक लेंगे
ये लोग कितने मुनासिब हैं, इस सफर के लिए

बैंक में नही था बैलेंस घर में नही है आटा उस पर भी कर दिया है अब नौकरी को टाटा दिल ऐ नादाँ तुझे हुआ क्या है...(बकौल राजकुमार केसवानी)


मेल पर आया एक चुटकुला आप सब से साझा कर रहा हूँ। मजेदार है। कृपया इसे बिना किसी वाद के चश्मे के पढ़ें और आनंद उठायें - ब्लॉगर
मेरी मेल पर ये तस्वीर एक दोस्त ने भेजी थी। इसमें दुनिया भर की चर्चित हस्तियों को एक साथ देखा जा सकता है... आप भी पहचानना चाहेंगे....................