सजन रे झूठ मत बोलो़...


मैं सोचता हूं कि हिंदी सिनेमा से जुड़े लोगों की कभी चर्चा की जाएगी तो क्या वह शैलेन्द्र और राज कपूर का जिक्र किए बिना पूरी होगी? शायद नहीं। उन्हें तो नियति ने भी एक अनूठे बंधन में बांध दिया था। 14 दिसम्बर को जहां राज कपूर इस दुनिया में आए थे वहीं शैलेन्द्र ने इसी तारीख को इस दुनिया को अलविदा कहा। एक का जन्म पेशावर में हुआ तो दूसरा रावलपिंडी में पैदा हुआ। एक ने पिता से रंगमंच व अभिनय का ककहरा सीखा तो दूसरा शुरू से है इप्टा से जुड़ गया. इसमें कोई शक नहीं कि राज कपूर ही वह फिल्मकार थे जिसके साथ शैलेन्द्र ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।

राज कपूर ने पहली बार शैलेन्द्र को एक कवि सम्मेलन में सुना था। उन्होंने अपनी फिल्मों के लिए उनके गीत मांगे, जाहिर है मस्त तबीयत शैलेन्द्र ने साफ इंकार कर दिया। दिन बीते जीवन की कड़वी हकीकतों से रूबरू होने के बाद शैलेन्द्र को जरूरत आन पड़ी वे बंबई पहुंचे राज कपूर के पास। उन्होंने उनकी फिल्म बरसात के लिए पहला गाना लिखा- बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम...।

एक और समानता जो दोनों में मिलती है वह थी जन सरोकारों की चिंता को अपनी रचनात्मकता के जरिए अभिव्यक्ति देने की। राज कपूर जहां उस समय आवारा, आग, बूट पोलिश, जागते रहो जैसे सिनेमा बना रहे थे वहीं शैलेन्द्र रमैया वस्ता वैया..., सब कुछ सीखा हमने ..., जिस देश में गंगा बहती है... जैसे गीत लिखकर निहायत ही आदर्श आम आदमी की कल्पना में जुटे हुए थे।

शैलेन्द्र का सपना तीसरी कसम
प्रख्यात लोकधर्मी कथाकार फणीष्वरनाथ रेणू की कहानी मारे गए गुलफाम पर एक फिल्म बनाना शैलेन्द्र का सपना था। राज कपूर को नायक लेकर उन्होंने इस पर फिल्म बनाई तीसरी कसम। कपूर ने दोस्ती निभाते हुए इसके लिए पारिश्रमिक लिया महज एक रुपया। विभिन्न कारणों से फिल्म का बजट बढ़ता गया और शैलेन्द्र कर्ज में डूबते गए। इसकी जिम्मेदारी काफी हद तक राज कपूर पर भी डाली जाती है। फिल्म के फ्लाप होने के सदमे ने सिनेमा के अब तक के शायद सबसे सशक्त गीतकार को हमसे छीन लिया। हालांकि उनकी मौत के बाद फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ।

पुनश्च-तीसरी कसम फिल्म में हीरामन की बैलगाड़ी को क्या मुख्य पात्रों से अलग करके देखा जा सकता है? अभी ब्रजेश भाई का एक लेख नेट पर देखा जिसके मुताबिक वह गाड़ी अब भी पूर्णिया जिले के बरेटा गांव में रेणू की बहन के घर पर रखी हुई है। -- Sandeep

4 comments:

निर्मला कपिला ने कहा…

िस जानकारी के लिये धन्यवाद्

गिरिधारी ने कहा…

आपने अच्छा लिखा है थोड़ा और विस्तार देते तो मजा आ जाता

शशिभूषण ने कहा…

हर बार लगता है यार विस्तार से लिखते...

अखिलेश चंद्र ने कहा…

kuchh adhoora sa laga.